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स्वयं सहायता समूहों को सहायता, महिलाओं को बढ़ने का रास्ता

यदि बात सामाजिक भागीदारी की हो तो पुरुष आगे दिखाई पड़ते हैं, महिलाओं की भागीदारी सामान्यतः नही होती है | पलामू के पाटन प्रखंड का किशुनपुर गाँव कुछ ऐसा ही था | सामाजिक बंधन महिलाओं के जहन में कूट कूट के भरा पड़ा था | घर का कार्य महिलाएं और घर के बहार का काम पुरुष करते हैं, यह  अवधारणा प्रायः किशुनपुर की ज्यादातर महिलाओं में था | हालाँकि, गाँव के कुछ महिलाएं स्वयं सहायता से जुड़ कर कार्य कर रही थीं, परन्तु कुछ समय के बाद वे समूह को आगे नही बढ़ा पाए, उन्हें स्वयं सहायता समूह को आगे ले जाने के लिए किसी प्रकार की सहायता एवं सहयोग किसी से भी नही मिल पाया था, जिसके चलते ज्यादातर समूह की महिलाएं अपने सहभागिता आगे नही बढ़ा सकीं |


किशुनपुर को आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत चुने जाने के बाद गाँव की महिलाओं को प्रेरित किया गया की वे भी अपनी सहभागिता अपने परिवार के तरक्की में कर सकती है | इसके लिए सभी स्वयं सहायता समूहों को पुनः जगाया गया, उन्हें प्रशिक्षण मुहैया करायी गयी | इसके साथ ही साथ समूह बहुत सारे समूह ग्राम स्तरीय अभियान में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया इसप्रकार समूह में कुछ गतिबिधियाँ शुरू हुई |


श्रीमती मालती देवी (सदस्य, खुसी आजीविका समूह) बताती हैं, पहले जब हमारा समूह शुरू हुआ था, तब हमें किसी भी प्रकार का प्रशिक्षण एवं वितीय सहायता मुहैया नही करायी गयी थी | माननीय सांसद महोदय जी के प्रयाशों से आज हमारा समूह फलफूल रहा है | हमारे समूह को आजीविका मिशन अनुदानित  ऋण पर मुहैया कराया गया और हम समूह की महिलाओं ने अपना रोजगार शुरू किया हैं |


इससे हमरा आत्म-विश्वास बढ़ा है और हमारी दशा सुधरी है | कल तक गाँव के पुरुष जो हमें नीची दृष्टी से देखते थे, अब वो हमें आदर भाव देते हैं | हमें बोलने आगे बढ़कर बात करने का मौका दिया जाता है | ये सब समूह के महिलाओं को प्रशिक्षण देने से संभव हुआ | संसाद आदर्श गाँव बनाने के बाद, गाँव में सामूहिक चर्चा होना शुरू हुआ जिसमे महिलाओं को भी काफी अवसर मिला की वो अपनी बात रख सकें |

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Nice initiative

 

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